Tuesday, 25 April 2017

Godse appealed & begged mercy against death sentence!

ANa Hanyatee
Some Sanghis are spreading a misleading info in social media that Godse didn't appeal to higher court after he had been sentenced to death..
Here is the Fact:
After Nathuram Godse was sentenced to death for the assassination of Mohandas Karamchand Gandhi, Godse’s family members had appealed before the privy council in London and had also sought mercy from the then governor-general.
This is among the lesser-known facts related to Godse’s trial for Gandhi’s murder, said lawyer Rajan Jayakar, who studied the original records of the trial while curating an exhibition to mark the Supreme Court of India’s golden jubilee in 2000.
The families of Godse and Apte filed a mercy petition with the then Governor-general C Gopalachari on November 5, 1949. But on November 7, 1949, he dismissed the petition, declining to interfere in the matter. Godse and Apte were hanged in the Ambala prison,” said Jayakar.

भगत सिंह और सावरकर एक साथ: फासीवादी गन्दी चाल!

भगत सिंह एक विचारक थे, जिनका आधार मार्क्सवाद था. लेनिन के क्रांति को सही मानते थे, और साथ देने की बात करते थे! उनकी अंतिम इक्छा लेनिन से मिलने की थी! हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन, जिसके कमांडर चन्द्र शेखर आजाद थे, की संरचना एक मजदुर वर्ग के राज्य की स्थापना थी, जिसका खात्मा कौंग्रेस और बाद में आर एस एस ने की!
सावरकर ने तो अंग्रेजों से माफ़ी मांगी और अपनी सजा ख़त्म करावा दी और बाकि की जिंदगी, जब तक अंग्रेज रहे, उनकी सेवा में बितायी, 1942 के भारत छोडो आन्दोलन के विरुद्ध काम किया!
कुछ युवा गाँधी का विरोध करते है, एक फैशन सा है पर उसने सावरकर की तरह गद्दारी नहीं की, हाँ, भारत स्वतंत्र होने पर कौंग्रेस का साथ दिया, जिसने नेहरु, पटेल के नेत्रित्व में भारत को पूंजीवाद के गोद में ठेल दिया! भगत सिंह केवल माला पहनने के लिए रह गये. यह काम तो आज आप भी कर रहा है!
साथियों, आप अगर भगत सिंह के विचारधारा के खिलाफ हैं, पूंजीवाद को अमरता देने के लिए कटिबद्ध है, तो यह आपकी समझ है, पर उन्हें और उनके साथियों को गद्दारों की पांति में न लायें. निचे के पोस्ट के धूर्तता को समझें और ऐसे पोस्ट को भेजने वालों के खिलाफ आवाज बुलंद करें!


मंगल पांडे को फाँसी❓
तात्या टोपे को फाँसी❓
रानी लक्ष्मीबाई को अंग्रेज सेना ने घेर कर मारा❓
भगत सिंह को फाँसी❓
सुखदेव को फाँसी❓
राजगुरु को फाँसी❓
चंद्रशेखर आजाद का एनकाउंटर अंग्रेज पुलिस द्वारा❓
सुभाषचन्द्र बोस को गायब करा दिया गया❓
भगवती चरण वोहरा बम विस्फोट में मृत्यु❓
रामप्रसाद बिस्मिल को फाँसी❓
अशफाकउल्लाह खान को फाँसी❓
रोशन सिंह को फाँसी❓
लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज में मृत्यु❓
वीर सावरकर को कालापानी की सजा❓
चाफेकर बंधू (३ भाई) को फाँसी❓
मास्टर सूर्यसेन को फाँसी❓
ये तो कुछ ही नाम है जिन्होंने स्वतन्त्रता संग्राम और इस देश की आजादी में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया❓
कई वीर ऐसे है हम और आप जिनका नाम तक नहीं जानते ❓

एक बात समझ में आज तक नही आई कि भगवान ने गांधी और नेहरु को ऐसे कौन से कवच-कुण्डंल दिये थे❓
जिसकी वजह से अग्रेंजो ने इन दोनो को फाँसी तो दूर, कभी एक लाठी तक नही मारी...❓
उपर से यह दोनों भारत के बापू और चाचा बन गए और इनकी पीढ़ियाँ आज भी पूरे देश के उपर अपना पेंटेंट समझती है❓

       गहराई से सोचिए❓❓                                               जिसने भी मुझे यह संदेश भेजा है,उसको धन्यवाद।कृपया आप भी आगे भेजें।

Saturday, 22 April 2017

अटल बिहारी वाजपयी: गोश्त और (गैर) राजनीति!

पुपुल जयकर भारतीय सांस्कृतिक परिषद की अध्यक्ष थीं . वाजपेयी जी विदेश मंत्री थे . एक प्रर्तिनिधि मंडल भारत से चीन गया था . प्रतिनिधि मंडल में वाजपेयी जी और पुपुल जयकर भी शामिल थे .
चीन में खाने की मेज़ पर कई तरह का खाना परोसा गया . पुपुल जयकर ने पूछ लिया कि ये किस चीज़ का गोश्त है ? मेज़बान ने बताया कि ये बीफ है . पुपुल जयकर ने कहा वाजपेयी जी इसे मत खाइए ये गोमांस है .
वाजपेयी जी ने मुस्कुराते हुए कहा पुपुल जी ये कोई भारत की गऊ माता का मांस थोड़े ही है ? ये तो चाईनीज़ काऊ का मीट है . मज़े से खाइए .
और वाजपेयी जी ने ठहाका लगा कर खाना शुरू कर दिया .
ये वाकया पुपुल जयकर ने निर्मला देशपांडे को सुनाया . निर्मला देशपांडे ने मुझे ये बात बताई थी .
बात बड़ी नहीं है . कोई व्यक्ति कुछ भी खा सकता है . लेकिन किसी के भोजन को मुद्दा बना कर राजनीति करने वालों की असलियत कैसी है ये जानना बड़ा दिलचस्प है !

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Tuesday, 18 April 2017

Vijay Mallya episode: Fascism & Revolution

Vijay Mallya is arrested & may be brought back to India. Even same may happen to Lalit Modi. May be Vadra, too, is arrested.
May be Ram Temple is erected in Ayodhya. May be Article 370 is demolished in J&K. May be Cow Slaughter is banned in entire India.
I am bringing these possibilities to the attention to my SM friends, who are very fond of 'challenging' RSS to bridge the gap between their sayings and doings.
Yes, hypocrisy is a synonym of Right Wing bourgeois parties but not necessarily in above quoted examples. You can google and find what Hitler said and what all he did in reality.
During economic crisis, the working class revolts and one of the known, tested and successful measure to crush them is divide them through "extraordinary" measures, which makes the middle class nitwits proud in their state authority.
Fascism has better means to judge your activities through organised & paid think tanks, repression measures and to save its rule, it even may punish/destroy some of its own parts, persons, along with millions of people!
Yes, what they are incapable of doing, even if they want to do so, is to bring down unemployment to zero, finish crime/corruption from the society as they are "babies" of capitalism. For this the profit rate of the ruling class will go down to zero if not in negative, which though happens in economic crisis. They can not establish the rule of the proletarian class by replacing the bourgeois class!
Further they can not claim to adhere materialism, opposed to idealism, as the base of their raison d'etre will be abolished.
So, if you are interested in fighting against fascism, against its base capitalism, the fight must be at the base and the force to fight against them is the exploited class, the proletarian class, through class struggle for establishing socialism, to destroy the monster for once and for ever. Otherwise the monster (Capital or Finance Capital) will be back among us with various masks; from social democracy to fascism, in between 21st Century Socialism, Crony Capitalism, good & bad capitalism, pro people capitalism, capitalism with good & kind hearted capitalists, like in Ram Rajya.
Friends, be firm in your own ideology, no wavering, no revinism, unite and struggle to abolish the last shred of capitalism in physical and in spiritual from, otherwise this virus is capable of reviving and enslaving you again!

Friday, 14 April 2017

पूंजीवादी सड़ांध

पूंजीवादी सड़ांध. संस्कृति, धर्म, जाति, देशवाद, अध्यात्म हर जगह सडन की बू है. रिसते, जहरीले मवाद दिख रहे हैं. 
पूंजीवादी उत्पादन गहरे संकट में है. पहले तो हर आर्थिक मंदी या संकट के बाद आर्थिक उफान नजर आता था, पर 2008 के बाद तो यह संकट पुरे विश्व में ठहर सा गया है. भयानक बेरोजगारी, महंगाई हर जगह व्याप्त है. आतंकवाद और युद्ध तक इसी का नतीजा है.
मजदुर वर्ग और किसान भी विरोध में सडकों पर आये. यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका, भारत, आदि में करोड़ों में प्रदर्शन भी हुए. कुछ वर्ग संघर्ष को भी अग्रसर हुए, यानि राज्य सत्ता को हस्तगत करने की कोशिश हुई, पर क्रन्तिकारी पार्टी ना होने की वजह से यह आन्दोलन हर जगह असफल रहा!
पूंजी के सत्ता ने पलट वार की. फासीवादी रुझान ही नहीं बल्कि इसका गन्दा, खुनी रूप हमारे बीच में आया! जनता के बिच से 10-15% बेरोजगार, लम्पट और मूढ़ तत्व इसके साथ हो लिए, पैसे भी मिलते हैं इनको इस जघन्य कार्य के लिए.
नतीजा? पूंजीवादी उत्पादन का तो पतन है ही, उत्पादन शक्तियों का, यानि, मजदूरों, मशीनों का भी क्षय हो रहा है! जो समाजवाद का विरोध करते हैं, वह यह सोचते हैं की निजी पूंजी ख़त्म हो जाने से व्यक्तिगत स्वतंत्रता ख़त्म हो जायेगा, वह यह नहीं देख पाते की कैसे पुन्न्जिवाद में व्यक्तिगत स्वतंत्रता है ही नहीं. बेरोजगारी, बेईज्ज़ती सामान्य है. सुबह से शाम तक 6-7 दिन तक खटो, तब जाकर 3 वक्त का भोजन मिल पता है. भारत में तो 18-20 करोड़ तो बेरोजगार हैं!
पूंजीवाद की ठहराव अब विनाश में बदल चूका है. विकास की बात करने वाले, चाहे नितीश, मोदी या फिर आप वाले हों, भोले हैं, या फिर जनता को धोखा दे रहे हैं! इस विनाश का असर फासीवाद है, यानि विद्रोह को दबाने का पूंजीवाद का राक्षसी रूप! अमेरिका, यूरोप में भी दिख रहा है!
इस फासीवादी राक्षस के विरुद्ध लड़ाई वापसी नहीं यानी पूंजीवादी उत्पादन व्यवस्था को सुन्दर बनाना नहीं बल्कि समाजवादी व्यवस्था लाना ही एकमात्र सफल लड़ाई होगी. यदि यह जहर बचा रहा, यानि इसका आधार पूंजी बचा रहा तो इसकी वापसी होगी, और भी भयानक रूप में. लडाई मजदुर वर्ग की एकता और संघर्ष ही साधन है!

Thursday, 13 April 2017

आदमी का माँस

एक गिद्ध का बेटा बोला - मैं तो आदमी का माँस खांऊंगा !
गिद्ध बोला - ठीक है ,ले आऊँगा !
शाम को जब गिद्ध लौटा तो सूअर का माँस ले आया ।खा कर बेटा बोला- यह तो सूअर का माँस है ,मैं तो आदमी का माँस ही खाऊँगा !
गिद्ध बोला- ठीक है लाता हूँ !
इस बार वह गाय का माँस ले आया । खाकर बेटा बोला- यह तो गाय का माँस है ,मैंने कहा न कि आदमी का माँस ही खाऊँगा !
गिद्ध बोला - ठीक है। इस बार ,तुझे आदमी का माँस ही खिलाऊँगा !
वह गया और सूअर का माँस मस्जिद के सामने और गाय का माँस मंदिर के सामने फेंक कर आ गया !
थोड़ी ही देर में वहाँ दंगा शुरु हो गया था और ख़ून की नदी में हजारों लाशें तैर रही थी !गिद्ध और उसके बेटे ने भरपूर आदमी का माँस खाया !
बेटेने पूछा - यह कैसे हुआ !
गिद्ध ने कहा - धर्म के नाम पर इस आदमी की जात को कभी भी लड़ाया जा सकता है ,फिर नेतागण और पंडित,पुजारी तो हैं ही आग में घी डालने को !
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गीता और क़ुरान पुस्तकालय में एक साथ रहते हैं ,लेकिन कभी भी झगड़ा नहीं करते !
MIHIR RUIDAS. की वाल से बंगला पोस्ट का भावानुवाद

Sunday, 2 April 2017

"प्रेमी संघर्ष दल": एंटी रोमिओ स्क्वाड का जवाब!

Padam Kumar ये फासीवादी सत्ता टटोल रही है कि कितना दम है इन आशिकों मे.. देख रहें है कि कितना सह सकते हैं ये लोग.. धीरे-धीरे ये सत्ता जान जाएगी कि ये तो नंपुसक हैं ... फिर देखना क्या हाल होगा.. दिख रहा है युवा लड़कियों मे लैला और जूलियट जैसी वीरता का आभाव है... युवा आशिक लड़कों की पुरुषार्थहीनता दीख रही है.. कायर आशिकों तुम लोग पिट रहे हो... ठीक ही है... आप लोग वही हो न ... जो कहते हो... "I hate politics" ... इसके बावजूद you politics haters वोट डालकर उंगली भी दिखाते हो ... वही हो न ... जो संघर्षशील महिलाओं को बहनजी कहकर मज़ाक उड़ाते हो... My body my choice वाले वीडियो को जमकर लाइक करने वालों.. संगठन, यूनियन और बौद्धिक सेमिनार आपको boring कहने वालों.. आप वही हो न "I Don't care" वाले ... जो एक अदद नौकरी और किराए का घर से आगे कुछ सोचना नहीं चाहते। वही हो न... जो डेली सोप के पात्रों सा दिखते हो ... सति मईया और करवा चौथ वाले.. आज पिट रहे हो उन्हीं से ... जिन संस्कृति रक्षकों की भक्ति करते नहीं थकते .... तुम्हारा पिटना ठीक है ... क्योंकि तुम हो तो उसी धारा के ... उसी के अनुयायी ... तुम तो खुद ही स्वयं को अपराधी मानते हो ... तभी तो छुप कर प्यार करते हो ... और पिटते हो.. तुम लोग हो मध्यम वर्गीय प्रतिक्रियावादी ... जो क्रान्ति और क्रान्तिविरोध दोनों का लाभ लेना चाहते हो... तुम्हारा पिटना जायज़ है मध्यम वर्गीय कायरों ... दम है तो बनाओं.. "प्रेमी संघर्ष दल"... और मुँह तोड़ दो एंटी रोमियो स्क्वाड का ...

Saturday, 1 April 2017

चुनाव 2017 : फासीवाद अब एक लक्षण नहीं रह गया है. यह हमारे बीच में है!

चुनाव 2017 : फासीवाद अब एक लक्षण नहीं रह गया है. यह हमारे बीच में है!: मीडिया ने भी ‘बखूबी’ अपना रोल निभाया. इस पर इतना कहना पर्याप्त होगा कि मीडिया एक व्यवसाय है, जिसका दोहरा चरित्र है. मुनाफे के आलावा यह प्रचार (खास वर्ग के लिए) में भी मुख्य हिस्सेदारी रखता है