Thursday, 31 December 2015

Religiosity Vs Atheism: Red fades to saffron in Kerala - The Hindu

Religiosity Vs Atheism: Red fades to saffron in Kerala - The Hindu: "The three drivers of Left politics — the backward castes, students and the working class — have changed their character in the last de...

Saturday, 26 December 2015

दमनकारी पंजाब सरकार ने जनता पर थोपा काला कानून

इस क़ानून में ‘स्ट्राइक, हड़ताल’ को नुकसान करने वाले कार्रवाई में शामिल किया गया है वहीं नुकसान को परिभाषित करते हुए ‘घाटे’ को भी नुकसान में गिना गया है। यानि अब अगर मज़दूर श्रम क़ानून लागू करवाने के लिए, वेतन वृद्धि या अन्य सुविधाओं के लिए, मालिक, पुलिस-प्रशासन, सरकार की गुण्डागर्दी के ख़िलाफ़, महँगाई के विरुद्ध या अन्य किसी मुद्दे पर हड़ताल करते हैं तो हड़ताली मज़दूरों और उनके नेता, हड़ताल में साथ देने वाले अन्य लोग, आदि इस क़ानून के मुताबिक़ यकीनन तौर पर दोषी माने जायेंगे। हड़ता...ल होगी तो ‘घाटा’ तो पड़ेगा ही।
इस तरह पंजाब सरकार हड़ताल करने को अप्रत्यक्ष ढंग से क़ैद और जुर्माने योग्य अपराध ऐलान कर चुकी है। अपने अधिकारों के लिए संघर्ष का हड़ताल का रूप मज़दूरों के लिए एक अति महत्त्वपूर्ण हथियार है। देश की उच्च अदालतें पहले ही हड़ताल के अधिकार पर हमला बोल चुकी हैं। 6 अगस्त, 2003 के एक फ़ैसले में भारत की सर्वोच्च अदालत ने सरकारी मुलाजिमों द्वारा हड़ताल को ग़ैरक़ानूनी करार दिया था। पंजाब सरकार इससे भी आगे बढ़कर सरकारी व निजी क्षेत्र में हड़ताल करने वालों, इसके लिए प्रेरित करने वालों, मार्गदर्शन करने वालों आदि के लिए सख्त सज़ाएँ लेकर आयी है।
 इस काले क़ानून का यह पहलू भी इसकी स्पष्ट गवाही है कि सरकार का मकसद मज़दूरों व अन्य मेहनतकश लोगों के संघर्षों को कुचलना है।