पूरा आलेख पढ़ें:- http://www.indianationalnews.com/us-parliament-say-india-gdp-is-fake-bjp-narendra-modi/#comment-100
आंकड़ो की हेरा फेरी केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व भर में हो रहा है! खासकर 2008 के बाद से पूंजीवादी आर्थिक सलाहकार बदहवासी में आंकड़ों के साथ छेड़खानी कर रहे हैं और जनता को दिखाने की कोशिश कर रहे हैं की सबकुछ ठीक है! देखा ही होगा जब स्टॉक मार्केट में जबरदस्त गिरावट आती है तो सरकार कूद पड़ती है की निवेशक घबराएँ नहीं; जैसे बुडे हुए करोड़ों अरबों पैसे वापस आ जायेंगे!
अमेरिका की टिपण्णी इसलिए नहीं है की भारत अपने आंकड़े ठीक करे बल्कि इसलिए है की दबाव बनाये रखे! मजदुरों के 'सुरक्षा' में बने कानूनों की धज्जी उड़ा दी है मोदी सरकार ने और किसानों के जमीं हड़पने के कानून जो कोंग्रेस ने ड्राफ्ट की थी, को पारित कर दिय है! ऍफ़ दी आई को बेशर्मी से पारित किया! फिर भी वैश्विक आर्थिक मंदी में अमेरिकी कंपनी अपने मुनाफा दर और मुनाफा नहीं बढ़ा पा रहे हैं, उन्हें और आसान तरीका चाहिए, लुटने का!
पुरे यूरोप में इस 'सुधार' का जबरदस्त विरोध हो रहा है और भारत के मजदुर वर्ग और किसान ज्यादा पीछे नहीं हैं! देखना है मोदी और आर एस एस किस हद तक सफल होते हैं अपने अमेरिकी और भारतीय मालिक को खुश करने में? हाँ, एक बात और है गौर करने की! धर्म, जाति, व्यक्ति पूजा पूरा सफल नहीं हुआ है, मजदुर वर्ग और किसानों के एकता तोड़ने में, तो भारत पाकिस्तान का मुद्दा आगे लाया गया है! देश वाद भी जबरदस्त मुद्दा है पूंजी के चमचों के पास जनता के मुख्य मुद्दा को पीछे करने का जैसे हिटलर ने किया था!
हम क्या करें? या कोई फिल्म नहीं चल रहा है, ख़त्म होने पर घर आ जाये और फिल्म निर्देशक पर टिपण्णी करें! यहाँ सवाल है करोडो के मौत और जीवन का!
आप खुद निर्णय करें किसके साथ हैं; 95% या फिर 5% परजीवियों के साथ!!
आंकड़ो की हेरा फेरी केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व भर में हो रहा है! खासकर 2008 के बाद से पूंजीवादी आर्थिक सलाहकार बदहवासी में आंकड़ों के साथ छेड़खानी कर रहे हैं और जनता को दिखाने की कोशिश कर रहे हैं की सबकुछ ठीक है! देखा ही होगा जब स्टॉक मार्केट में जबरदस्त गिरावट आती है तो सरकार कूद पड़ती है की निवेशक घबराएँ नहीं; जैसे बुडे हुए करोड़ों अरबों पैसे वापस आ जायेंगे!
अमेरिका की टिपण्णी इसलिए नहीं है की भारत अपने आंकड़े ठीक करे बल्कि इसलिए है की दबाव बनाये रखे! मजदुरों के 'सुरक्षा' में बने कानूनों की धज्जी उड़ा दी है मोदी सरकार ने और किसानों के जमीं हड़पने के कानून जो कोंग्रेस ने ड्राफ्ट की थी, को पारित कर दिय है! ऍफ़ दी आई को बेशर्मी से पारित किया! फिर भी वैश्विक आर्थिक मंदी में अमेरिकी कंपनी अपने मुनाफा दर और मुनाफा नहीं बढ़ा पा रहे हैं, उन्हें और आसान तरीका चाहिए, लुटने का!
पुरे यूरोप में इस 'सुधार' का जबरदस्त विरोध हो रहा है और भारत के मजदुर वर्ग और किसान ज्यादा पीछे नहीं हैं! देखना है मोदी और आर एस एस किस हद तक सफल होते हैं अपने अमेरिकी और भारतीय मालिक को खुश करने में? हाँ, एक बात और है गौर करने की! धर्म, जाति, व्यक्ति पूजा पूरा सफल नहीं हुआ है, मजदुर वर्ग और किसानों के एकता तोड़ने में, तो भारत पाकिस्तान का मुद्दा आगे लाया गया है! देश वाद भी जबरदस्त मुद्दा है पूंजी के चमचों के पास जनता के मुख्य मुद्दा को पीछे करने का जैसे हिटलर ने किया था!
हम क्या करें? या कोई फिल्म नहीं चल रहा है, ख़त्म होने पर घर आ जाये और फिल्म निर्देशक पर टिपण्णी करें! यहाँ सवाल है करोडो के मौत और जीवन का!
आप खुद निर्णय करें किसके साथ हैं; 95% या फिर 5% परजीवियों के साथ!!
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