http://janchowk.com/Beech-Bahas/pm-modi-israel-india-teen-murti-hindutva-first-worldwar/1846
सही विश्लेषण! पर क्या इन विश्लेषणों से "हिंदुत्ववादी" शक्तियों को हराया जा सकता है? वैसे भी इन दक्षिणपंथियों को हराने की जरुरत क्यूँ है?
यदि हम इन शक्तियों के उदय का आधार देखें तो पाते हैं की वह पूंजीवाद है, जो संकट में है और इस संकट का उसके पास कोई इलाज नहीं है. यदि वह है, तो केवल उत्पादक शक्तियों का विनाश है. यह दुनिया में तक़रीबन हर जगह दिख रहा है. और यह फासीवाद है, एक प्रतिक्रियावादी, खूंखार जनविरोधी आन्दोलन है! समाज का एक हिस्सा ही इस आन्दोलन में शामिल है और अपने ही शोषित वर्ग के खिलाफ काम कर रहा है. इस फासीवाद का उदय पूंजीवाद से ही हुआ है और इसका लक्ष्य पूंजी के मुनाफा दर को बढ़ाना है, चाहे मजदूर वर्ग और किसान तबाह हो जाएँ. श्रम कानून, पर्यावरण कानून आदि को ख़त्म किया जा रहा है, जमीन हड़पने के सारे कानूनी और गैर कानूनी उपाय किये जा रहे हैं! और इन शोषण और प्रतारण के प्रतिरोध का इस फासीवादी तरीके से किया जा रहा है!
तो क्या इस फासीवाद का खात्मा शोषित वर्ग के आलावा और कोई कर सकता है? वह भी मजदूर वर्ग के नेत्रित्व के बिना? बिना मजदूर वर्ग के एक क्रन्तिकारी पार्टी के, बिना क्रन्तिकारी विचारधारा के?
यदि हम इस बात को समझें तो सर्वहारा क्रांति की तैयारी कर सकते हैं, फासीवाद और इसकी जननी पूंजीवाद को ही दफ़न कर सकते हैं और समाजवाद की स्थापना कर सकते हैं!
सही विश्लेषण! पर क्या इन विश्लेषणों से "हिंदुत्ववादी" शक्तियों को हराया जा सकता है? वैसे भी इन दक्षिणपंथियों को हराने की जरुरत क्यूँ है?
यदि हम इन शक्तियों के उदय का आधार देखें तो पाते हैं की वह पूंजीवाद है, जो संकट में है और इस संकट का उसके पास कोई इलाज नहीं है. यदि वह है, तो केवल उत्पादक शक्तियों का विनाश है. यह दुनिया में तक़रीबन हर जगह दिख रहा है. और यह फासीवाद है, एक प्रतिक्रियावादी, खूंखार जनविरोधी आन्दोलन है! समाज का एक हिस्सा ही इस आन्दोलन में शामिल है और अपने ही शोषित वर्ग के खिलाफ काम कर रहा है. इस फासीवाद का उदय पूंजीवाद से ही हुआ है और इसका लक्ष्य पूंजी के मुनाफा दर को बढ़ाना है, चाहे मजदूर वर्ग और किसान तबाह हो जाएँ. श्रम कानून, पर्यावरण कानून आदि को ख़त्म किया जा रहा है, जमीन हड़पने के सारे कानूनी और गैर कानूनी उपाय किये जा रहे हैं! और इन शोषण और प्रतारण के प्रतिरोध का इस फासीवादी तरीके से किया जा रहा है!
तो क्या इस फासीवाद का खात्मा शोषित वर्ग के आलावा और कोई कर सकता है? वह भी मजदूर वर्ग के नेत्रित्व के बिना? बिना मजदूर वर्ग के एक क्रन्तिकारी पार्टी के, बिना क्रन्तिकारी विचारधारा के?
यदि हम इस बात को समझें तो सर्वहारा क्रांति की तैयारी कर सकते हैं, फासीवाद और इसकी जननी पूंजीवाद को ही दफ़न कर सकते हैं और समाजवाद की स्थापना कर सकते हैं!
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